
@नवल खबर ब्यूरो
काशीपुर। नगर के हृदय स्थल में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन ने सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य पर गहरी छाप छोड़ी। यह आयोजन केवल एक सभा नहीं, बल्कि आस्था, सांस्कृतिक चेतना और वैचारिक संवाद का विशाल मंच बनकर उभरा। कार्यक्रम की गरिमा उस समय और बढ़ गई जब कल्कि धाम पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे।
ढोल-नगाड़ों की गूंज, शंखनाद और जयघोष के बीच आचार्य का भव्य स्वागत किया गया। हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं, साधु-संतों, मातृशक्ति और युवाओं की उपस्थिति ने आयोजन को आस्था के महासंगम में बदल दिया।

अपने संबोधन में आचार्य प्रमोद कृष्णम ने चुनावी राजनीति और सनातन संस्कृति के संबंध पर स्पष्ट विचार रखते हुए कहा कि लोकतंत्र में चुनाव आते-जाते रहते हैं, लेकिन भारत की आत्मा उसकी सनातन परंपरा में निहित है। उन्होंने कहा कि सत्ता परिवर्तन से ऊपर राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना को समझना आवश्यक है।

उन्होंने विपक्षी नेताओं, विशेषकर अखिलेश यादव और राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए समाज को विभाजित करने वाली राजनीति से सावधान रहने की बात कही। सार्वजनिक जीवन में शब्दों की मर्यादा और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने पर भी जोर दिया।

जातिवाद के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि ‘हिंदू’ पहचान व्यापक सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है, जो भेदभाव से ऊपर उठकर समाज को जोड़ती है। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि सनातन परंपरा को मजबूत करने के लिए एकजुट रहना समय की आवश्यकता है।
सम्मेलन के दौरान भगवान राम, कृष्ण और भगवान श्री कल्कि के संदर्भ में सनातन की विविध धाराओं का उल्लेख किया गया। कार्यक्रम का समापन सामूहिक संकल्प के साथ हुआ, जिसने सांस्कृतिक जागरण और सामाजिक समरसता का संदेश दिया।
