
@नवल खबर ब्यूरो
काशीपुर। यूजीसी द्वारा लागू किए गए नियम 2026 के विरोध में काशीपुर में सामाजिक एवं शैक्षिक संगठनों का आक्रोश खुलकर सड़कों पर दिखाई दिया। “यूजीसी बिल हटाओ संघर्ष समिति” के आह्वान पर नगर में जोरदार विरोध रैली निकाली गई, जिसके माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी के माध्यम से प्रेषित किया गया। रैली का नेतृत्व एडवोकेट हरि सिंह एवं संजय चतुर्वेदी ने किया।
रैली के दौरान वक्ताओं ने यूजीसी के नए नियमों को देश की शैक्षणिक व्यवस्था के लिए घातक बताते हुए कहा कि यह निर्णय योग्यता, परिश्रम और समान अवसर की संवैधानिक भावना के पूरी तरह विपरीत है। समिति ने आरोप लगाया कि इस नियम के लागू होने से शिक्षा व्यवस्था में गंभीर असंतुलन पैदा होगा, जिससे शिक्षाविदों, छात्रों और अभिभावकों में भारी रोष व्याप्त है।
ज्ञापन में कहा गया कि यूजीसी का यह फैसला समाज में असंतोष, असुरक्षा और असमानता की भावना को बढ़ावा दे रहा है, जो राष्ट्रहित के लिए अत्यंत चिंताजनक है। समिति ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी वर्ग विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि सभी को समान, न्यायपूर्ण और पारदर्शी अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

संघर्ष समिति ने मांग की कि यूजीसी के इस निर्णय को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए तथा शिक्षाविदों की एक नई विशेषज्ञ समिति गठित कर जनभावनाओं के अनुरूप नई व्यवस्था लागू की जाए। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शीघ्र इस पर पुनर्विचार नहीं किया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
प्रदर्शन में अग्रवाल सभा, क्षत्रिय सभा, पंजाबी सभा, ब्राह्मण सभा, चौहान सभा, बिश्नोई सभा, काशीपुर बार एसोसिएशन, छात्र संघ सहित सवर्ण समाज की अनेक सभाओं की सक्रिय भागीदारी रही।

रैली एवं ज्ञापन सौंपने के कार्यक्रम में प्रमुख रूप से संजय चतुर्वेदी, एडवोकेट हरीश कुमार सिंह, मनोज अग्रवाल, डॉ. दीपिका गुड़िया आत्रेय, गीता चौहान, विमल गुड़िया, राजीव घई, संदीप चतुर्वेदी, अरुण चौहान, सुभाष चंद्र शर्मा, आर.सी. त्रिपाठी, सुरेश चंद्र जोशी, काशीपुर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष गिरजेश खुल्वे, उमेश जोशी एडवोकेट, मयंक शर्मा, गौरव गर्ग, जगदीश चंद्र बौड़ाई, सूर्य प्रताप सिंह, मोहन पपनै, मनोज पंत, त्रिलोक अधिकारी, शुभम उपाध्याय एडवोकेट, रवि ढींगरा, प्रकाश खनुलिया, महेश चंद्र शर्मा, पंकज टंडन, अशोक राजपूत, शरद पंत, शंभू लखेड़ा सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
