
@नवल खबर ब्यूरो
काशीपुर।इसे कहते हैं काम और काम की राजनीति। काशीपुर के वर्षो के इतिहास में यह पहला अवसर होगा जब नगर में प्रवेश करने वाले हजारों शिवभक्त कांवड़ियों को बैलजूड़ी और काशीपुर क्षेत्र में अंधेरे से जूझना नहीं पड़ेगा। वर्षों से उपेक्षित ढेला पुल की समस्या को गंभीरता से लेते हुए महापौर दीपक बाली ने ऐसा कार्य कर दिखाया है, जो दशकों में कोई जनप्रतिनिधि नहीं कर पाया।
महापौर बनने के बाद से ही दीपक बाली शिवभक्त कांवड़ियों की सुरक्षा और सुविधा को लेकर संवेदनशील रहे हैं। गत वर्ष समय की कमी के चलते उन्होंने सरकारी व्यवस्था की प्रतीक्षा किए बिना अपने निजी खर्च से ढेला पुल पर जनरेटर के माध्यम से लाइटों की व्यवस्था करवाई थी, जिससे कांवड़ियों और आम नागरिकों को बड़ी राहत मिली और दुर्घटनाओं पर भी रोक लगी।
इस वर्ष महापौर ने और एक कदम आगे बढ़ते हुए इस व्यवस्था को स्थायी और मजबूत रूप दे दिया। नगर निगम के माध्यम से करीब 2 लाख रुपये की लागत से पूरे मार्ग पर 21 बिजली के खंभे लगवाकर उन पर हाईमास्ट लाइटें स्थापित कराई गईं। खास बात यह रही कि महापौर दीपक बाली स्वयं मौके पर मौजूद रहे और एक-एक लाइट जलाकर उसकी कार्यप्रणाली का निरीक्षण भी किया।

उल्लेखनीय है कि शिवरात्रि महापर्व पर उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के हजारों शिवभक्त कांवड़ लेकर इसी मार्ग से गुजरते हैं। वर्षों से ढेला पुल पर प्रकाश व्यवस्था न होने के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता था। जनता और शिवभक्त लगातार इस समस्या की ओर ध्यान दिलाते रहे, लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधि ने इस दिशा में ठोस पहल नहीं की।
महापौर दीपक बाली की इस पहल से न केवल कांवड़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित हुई है, बल्कि काशीपुर की एक सकारात्मक छवि भी दूर-दूर तक गई है। उन्होंने बताया कि नंगे पैर चलने वाले शिवभक्तों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए सड़कों की विशेष सफाई कराई जा रही है। साथ ही शहर के भीतर और भंडारों वाले क्षेत्रों में भी सफाई व्यवस्था को और बेहतर किया गया है।
गौरतलब है कि महापौर दीपक बाली स्वयं भी वर्षों से जसपुर रोड से बैलजूड़ी की ओर तिराहे पर लगने वाले भंडारों में सहयोग करते रहे हैं और मौके पर पहुंचकर शिवभक्तों की सेवा करते हैं। इस सेवा कार्य में संजीवनी हॉस्पिटल परिवार का विशेष सहयोग भी उल्लेखनीय रहा है।
महापौर द्वारा कराए गए इस ऐतिहासिक कार्य की चारों ओर सराहना हो रही है। जनता और शिवभक्तों का कहना है कि अगर नेता ऐसा हो, तो समस्याएं खुद रास्ता छोड़ देती हैं।
