
@नवल खबर ब्यूरो
काशीपुर। जहाँ आज के दौर में सफलता को अक्सर केवल पढ़ाई से जोड़ा जाता है, वहीं काशीपुर से शुरू हुई एक अनोखी पहल इस सोच को बदलने का काम कर रही है। “आने वाले 50 तारे”—उर्वशी दत्त बाली द्वारा शुरू की गई यह पहल अब अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल कर चुकी है और नए मुकाम की ओर बढ़ रही है।

यह पहल विशेष रूप से अनाथ और जरूरतमंद बच्चों के लिए शुरू की गई है, जिसमें उन्हें केवल स्कूली शिक्षा ही नहीं, बल्कि जीवन से जुड़े विभिन्न व्यावहारिक कौशल भी सिखाए जा रहे हैं। उर्वशी दत्त बाली का स्पष्ट कहना है कि जब ये बच्चे पढ़ाई पूरी कर समाज में कदम रखें, तो उनके पास सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि ऐसा हुनर भी हो जो उन्हें आत्मनिर्भर बनाए और वे आत्मविश्वास के साथ जीवन जी सकें।

इसी सोच के तहत बच्चों को सिलाई, बेकिंग, होटल सर्विस, फोटोग्राफी, इंग्लिश स्पीकिंग, पर्सनैलिटी डेवलपमेंट, हेयर ड्रेसिंग, पार्लर कार्य, प्लंबिंग, बिजली कार्य और डिजिटल स्किल्स जैसी कई विधाओं में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही 20 वर्षों तक अमेरिका में रह चुके शांतनु चिकारा द्वारा बच्चों के कम्युनिकेशन स्किल और कॉन्फिडेंस पर विशेष कार्य किया जा रहा है। प्रशिक्षण के अंत में बच्चों को प्रमाण पत्र भी प्रदान किए जाएंगे, जिससे उन्हें भविष्य में बेहतर अवसर मिल सकें।

इस पहल की खास बात यह है कि अब इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिल चुकी है। University of Oxford (यूके) के डिपार्टमेंट ऑफ एजुकेशन से जुड़े स्कॉलर और यश फाउंडेशन इंडिया के प्रोजेक्ट डायरेक्टर तेजस डोंगरे इस अभियान से जुड़ गए हैं और बच्चों के विकास के लिए कार्य शुरू कर दिया है। यह सहयोग इस बात का प्रमाण है कि छोटे शहरों से भी बड़े सपने निकल सकते हैं। यश फाउंडेशन इंडिया पिछले 14 वर्षों से ग्रामीण भारत में शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
इस पहल के तहत “आने वाले 50 तारे” कार्यक्रम का आयोजन काशीपुर में ही किया जाएगा, जिसमें द गुरुकुल फाउंडेशन स्कूल के 50 बच्चों के साथ हर माह गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी। इसमें शिक्षक और विद्यार्थी मिलकर बच्चों के सर्वांगीण विकास में योगदान देंगे।

कार्यक्रम में नेताजी सुभाष चंद्र बोस राजकीय इंटर कॉलेज, पीरू मदारा के खंड शिक्षा अधिकारी श्री साहू और प्रधानाचार्य श्री ए.के. पांडे का भी विशेष सहयोग मिल रहा है। उनके मार्गदर्शन से सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को भी इस पहल से जुड़ने और नए अवसर प्राप्त करने का मौका मिल रहा है।
वहीं गुरुकुल फाउंडेशन स्कूल के चेयरमैन डॉ. नीरज कपूर, डायरेक्टर डॉ. वसुधा कपूर और प्रधानाचार्या श्रीमती मीनल बधवार भी इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनका मानना है कि समाज से मिला ज्ञान और संसाधन शिक्षा के माध्यम से समाज को लौटाना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है।
यह पहल केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक मजबूत संकल्प है—बच्चों को अवसर देने का, उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का और उनके सपनों को साकार करने का। खास बात यह है कि इस नेक कार्य में काशीपुर की जनता भी पूरी तरह उर्वशी दत्त बाली के साथ खड़ी नजर आ रही है।
