
@नवल खबर ब्यूरो
काशीपुर। प्राचीन एवं पौराणिक तीर्थ द्रोणासागर की धार्मिक और ऐतिहासिक पवित्रता से कथित छेड़छाड़ को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। श्री डमरू वाले बाबा मंदिर ट्रस्ट सहित कई धार्मिक व सामाजिक संगठनों ने द्रोणासागर क्षेत्र में किए गए अवैध अतिक्रमण, धोखाधड़ी और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के नियमों के उल्लंघन के गंभीर आरोप लगाए हैं।
ट्रस्ट और संगठनों का आरोप है कि काशीपुर डेवलपमेंट फोरम (केडीएफ) के अध्यक्ष राजीव घई द्वारा वर्ष 2022 से तीर्थ भूमि पर नियमों की अनदेखी करते हुए अवैध कब्जा किया गया है। आरोप के अनुसार 22 जनवरी 2022 को शंभूनाथ से केवल 600 वर्गमीटर भूमि की रजिस्ट्री कराई गई थी, जबकि वर्तमान में लगभग 1000 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्र पर कब्जा कर लिया गया है।
बताया गया कि यह भूमि गोविषाण टीले की परिधि में स्थित है, जो एएसआई द्वारा संरक्षित क्षेत्र है। एएसआई के नियमों के अनुसार किसी भी संरक्षित स्मारक या स्थल के 100 मीटर के दायरे में किसी प्रकार की रजिस्ट्री, निर्माण या गतिविधि पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद बिना एएसआई या प्रशासन की अनुमति के बाउंड्रीवाल और कार्यालय का निर्माण कराए जाने का आरोप लगाया गया है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उक्त भूमि पर धनुर्विद्या प्रशिक्षण के नाम पर गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं, जबकि इसके लिए एएसआई से किसी भी प्रकार की स्वीकृति नहीं ली गई। इसके अतिरिक्त

एएसआई कार्यालय से सटे चिल्ड्रन पार्क पर भी केडीएफ का बोर्ड लगाकर कब्जा करने का आरोप लगाया गया है।
मंदिर ट्रस्ट ने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि 2 दिसंबर 2024 को श्री डमरू वाले बाबा मंदिर प्रांगण में जेसीबी मशीन से फलदार एवं जंगली वृक्षों की कटाई कराई गई तथा बिना किसी अनुमति के खनन कर मिट्टी उठाई गई। विरोध करने पर ट्रस्ट पदाधिकारियों और श्रद्धालुओं के साथ गाली-गलौच और जान से मारने की धमकी दिए जाने का भी दावा किया गया है।
ट्रस्ट का कहना है कि इस पूरे मामले की शिकायत उपजिलाधिकारी काशीपुर को कई बार लिखित रूप से दी गई, लेकिन अब तक न तो कोई ठोस जांच हुई और न ही कोई प्रभावी कार्रवाई की गई। आरोप है कि उल्टे अतिक्रमणकर्ता को अतिरिक्त 1000 वर्गमीटर भूमि देने का प्रयास किया जा रहा है, जो सरकार द्वारा चलाए जा रहे धार्मिक अतिक्रमण विरोधी अभियान की भावना के विपरीत है।
श्री डमरू वाले बाबा मंदिर ट्रस्ट ने सभी धार्मिक व सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों, युवाओं, व्यापारियों, जनप्रतिनिधियों और आस्थावान नागरिकों से द्रोणासागर की पवित्रता और धार्मिक स्वरूप की रक्षा के लिए एकजुट होकर विरोध करने की अपील की है। ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि तीर्थ की मूल पहचान को बदलने या उसकी पवित्रता से समझौता करने का कोई भी प्रयास किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा, और धर्म व न्याय की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
