
@नवल खबर ब्यूरो
काशीपुर। नगर की फिजाओं में इन दिनों विकास की खुशबू से ज्यादा प्रशासनिक असमन्वय की धूल उड़ती नजर आ रही है। उधम सिंह नगर का यह प्रमुख शहर एक ऐसी विडंबना से गुजर रहा है, जहाँ सरकारी धन खर्च तो हो रहा है, लेकिन उसका लाभ जनता तक पहुँचने से पहले ही विभागीय लापरवाही की भेंट चढ़ जाता है।
नगर निगम और अन्य विभागों के बीच तालमेल का अभाव इस कदर दिख रहा है कि एक ओर शहर को संवारने का काम होता है, तो दूसरी ओर वही काम कुछ ही समय बाद दोबारा खोदकर बर्बाद कर दिया जाता है। यह केवल एक सड़क के क्षतिग्रस्त होने की घटना नहीं, बल्कि करदाताओं के भरोसे और उनकी मेहनत की कमाई पर चोट है।
इधर महापौर दीपक बाली शहर की सूरत सुधारने और बढ़ते वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सड़कों की कच्ची पटरियों पर सीमेंटेड टाइल्स बिछाने का अभियान चला रहे हैं। इसी योजना के तहत मानपुर रोड जैसे व्यस्त मार्गों पर कार्य तेजी से पूरा किया गया, जिससे राहगीरों को धूल से राहत मिली और शहर की छवि भी निखरी।
लेकिन हाल ही में मानपुर रोड पर बाबा रिसोर्ट के समीप जो दृश्य सामने आया, उसने इस पूरी पहल पर सवाल खड़े कर दिए। टाइल्स बिछने के कुछ ही समय बाद जल संस्थान की टीम पाइपलाइन लीकेज का हवाला देते हुए खुदाई करने पहुँच गई और नया निर्माण क्षतिग्रस्त कर दिया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि लीकेज की समस्या नई नहीं थी। आरोप है कि जब निर्माण कार्य चल रहा था, तब विभाग निष्क्रिय रहा और काम पूरा होते ही खुदाई शुरू कर दी गई।
महापौर ने पहले ही बिना अनुमति सड़क खोदने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी थी और संबंधित विभाग से अपने खर्च पर पुनर्निर्माण कराने की बात कही थी। इसके बावजूद हुई खुदाई ने प्रशासनिक समन्वय पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब देखना यह है कि क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होती है या फिर काशीपुर की सड़कों पर विकास और विनाश का यह सिलसिला यूँ ही चलता रहेगा।
