
@नवल खबर ब्यूरो
काशीपुर। महानगर कांग्रेस कमेटी की जिला अध्यक्ष अलका पाल ने केंद्र सरकार पर महिला आरक्षण के मुद्दे को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के नाम पर लाया गया परिसीमन से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक (131) वास्तव में महिला सशक्तिकरण से जुड़ा नहीं है, बल्कि यह देश के चुनावी और राजनीतिक मानचित्र को बदलने का प्रयास है।
अलका पाल ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार दक्षिण भारत, पूर्वोत्तर राज्यों और छोटे राज्यों से प्रतिनिधित्व कम कर देश की राजनीतिक संरचना को प्रभावित करना चाहती है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण का सहारा लेकर भाजपा सरकार अपने राजनीतिक हित साधने में लगी हुई है।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस संविधान संशोधन विधेयक का महिला सशक्तिकरण से कोई लेना-देना नहीं है, बल्कि महिलाओं का उपयोग एक आड़ के रूप में किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर सरकार 2023 के महिला आरक्षण अधिनियम को लागू करने से क्यों बच रही है।
अलका पाल ने इस विधेयक को महिलाओं, जाति जनगणना, संविधान और संघीय ढांचे के खिलाफ बताते हुए कहा कि सरकार परिसीमन को एक राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने केंद्र सरकार से यह भी पूछा कि महिला आरक्षण कानून के तहत ओबीसी महिलाओं को आरक्षण देने के लिए क्या ठोस व्यवस्था की गई है, क्योंकि इस विषय पर सरकार या उसके प्रतिनिधियों की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है।
अंत में उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार वास्तव में महिला सशक्तिकरण के प्रति गंभीर है, तो उसे बिना किसी भेदभाव के 2023 के महिला आरक्षण अधिनियम को तुरंत लागू करना चाहिए।
